राह अपनी अपनी
क्यों मै बताउं तुमे
कि क्या तुमने किया
क्या तुम नही जानती कि
क्या तुमने किया
क्यों हो चाहती तुम कि
बताउं तुम्हे कि मै हूँ तुमसे खफा
क्यों चाहती हो तुम कि दूं सफाई का मौका तुम्हे
और क्यों न हूँ मै तुमसे खफा
होना खफा या लेना सफाई तुमसे
होगा नए रिश्तो को देना अंजाम
जबकि मै हूँ पहले से ही
तुम्हारे हमारे रिश्तो से परेशान
तुम रही समझती कि
हम समझते कुछ नही
हम रहे समझाते खुद को
कि ऐसा कभी हो सकता नही
तुम हमारे पास रहकर भी
दूर रही हमारे दिल से
हमने तुम्हे दिल मै बसाकर
भी दूर कर दिया खुद से
तुम खड़ी खड़ी भी रही
मुढ़ती पीछे कि ओर
हम झुक नही सके और
बस खड़े खड़े तुम्हे देखते रहे
तुम रहे समझते कि
हम तुम्हे समझते नहीं
हम जानते थे कि तुम्हे
हम जानकर भी जानना चाहते नही
बस इसी तरह चलते चलते
गुजर गए जिन्दगी कि राह से
और फिर तुम अपनी राह चल दी
और मै अपने रास्ते चल दिया II
लेखक प्रवीन चन्द्र झांझी
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