हिसाब
लोगो ने मेरा इस्तेमाल किया
इसका दुःख है मुझे
पर तुम देखती रही
इसने मुझे शर्मसार कर दिया
या तो तुम मुझे समझ नही सकी
या मै तुम्हे समझा नही सका
या तुम मुझे अपना नही सकी
या मै तुम्हे अपना बना नही सका
या तो तुम स्वार्थी थी
या मै कमअक्ल था
शायद मै ही कम अक्ल था
क्योंकि आखिर इस्तेमाल तो मै ही हुआ
आखिर मेरा ही हुआ शोषण
आखिर मै ही लुटा
तुम्हारा या किसी और का क्या गया
जो गया मेरा ही गया
मगर अभी खतम कहाँ हुआ है यह तमाशा
अभी तो जिन्दगी बाकि है
फिर मिलेंगे किसी जन्म मै तो करेंगे हिसाब
क्या तुमने पाया और क्या हमारा गया II
लेखक प्रवीन चन्द्र झांझी
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