Monday, September 2, 2013

नई कहावत 
कह गए ऋषि मुनि हमारे
जीवन है खेल तमाशा
ऐसे है नेता हमारे कर दिया संधि विच्छेद उसका
और बना दिया खेल को एक तमाशा

कहते थे कोयले को काला सोना
पर इन नेताओ ने मिल बाँट कर
इस काले सोने की खानो  को लूट लिया
अब करते है रोज ये झूठा मूठा रोना 
अब करते है रोज नूरा कुश्ती
और करते है रोज संसद में हंगामा
हो जाते है इकट्ठे जब करता है सुप्रीम कोर्ट
इनकी अपराधी प्रवर्ती पर ऊँगली उठाना

मगर है तारीफ़ इनकी की
इन्होने पांड्वो के सिदान्त को भी मान लिया
जिस की जितनी औकात थी उसको
उतना सोना बाँट दिया
जब इनके असली हकदारों (स्थानीय आदिवासी )ने
मांगा अपना हक तो था उन्हें बुरी तरह डांटा

किसी ने कोयले में खाया
किसी ने 2G में खाया
किसी ने खेलो में खाया
और किसी ने  रेलों में खाया
किसी को कुछ नही मिला तो वो
बिना मजदूर के नालिया को  साफ़ कराया
और आम आदमी इस भ्रष्टाचार से
बुरी तरह करह रहे  है
पर ये तो चैन की बंसी बजा रहे है

 इनको तो न है  कोई शर्म न कोई लाज
चाहे हो जाए 80 रूपये प्याज
अब तो बस आम आदमी का बज गया बाजा
यंहा तो है 100 रूपये सेर भाजी और 1000 रूपये सेर खाजा

लेखक प्रवीन चन्द्र झांझी