Thursday, June 24, 2010

KUL - YESTERDAY OR TOMMORROW

कल

होता है कोई जब पास तुम्हारे
तब तुम उसे क्यों नहीं सम्भालते

रोता है जब कोई पास तुम्हारे
क्यों हँसते हो उसपर तुम
क्यों तुम उसे नही पुचकारते

जब मांगता है कोई प्यार तुमसे
क्यों करते हो आहत भावनाए उसकी
क्यों प्यार से उसे पास नहीं बिठालते

गिर जाता है कोई चलते चलते साथ तुम्हारे
क्यों मारते हो एक और ठोकर उसको
पकढ़कर बाहं उसकी क्यों उसे नही उठालते 

दिखाता है कोई जख्म जब तुमको
क्यों छिढ़कते हो नमक उसपर
लगाकर मलहम  उसपर क्यों उसे नहीं सम्भालते

अरे ! मत याद करो बीते कल को
संभालो आज को जो है पास तुम्हारे
नही तो निकाल जायेगा आने वाला कल भी हाथ से
और रह जाओगे बस तुम उसे पुकारते II

लेखक :  प्रवीण चन्द्र झांझी     

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