जीवन
हुआ पैदा मै जब तो कहा मेरे पिता ने
बड़ी देर लगा दी यार
बहुत कराया तुने इंतज़ार
आया तू चार लडकियों के बाद
कुछ मजा नही आया
गया स्कूल मै जब मिला टीचर से
नही दी कोई donation और
टेस्ट में मै होगया पास
कहा टीचर ने दाखिला तो मिल गया यार
पर मजा नहीं आया
गया कॉलेज में मिला लडकियों से
कहा उन्होंने देखने में हो ठीक ठाक
पर हो किसी रईस की नही औलाद
मगर चलो बैठो हमारे पास
पर मजा नही आया
गया जब करने नौकरी
तो कहा बास ने कुछ कर के दिखाओ
मेहनत तो खूब की पर उपर से कुछ नही किया
हो गया बास नाराज और
कहने लगा ये बात
की मजा नही आया
हुई शादी उसके बाद आई बीवी घर में
लाई दो बड़ी बहनों की नसीहत अपने साथ
चाहती थी वो तीनो की सुनु मै उनकी बात
नही दिया अपने घर का रिमोट जब उनके हाथ
तो बोली तीनो एक साथ की
मजा नही आया
जब तक थे जिन्दा माँ बाप
रखना था उनको हमारे साथ
सब बहने सुनती रही हमारी बात
जाते ही उनके मचा दी बन्दर बाँट
जब बाद कर्तव्य के मैंने मांगे अपने अधिकार
तो लगी कहने सब एक ही बात
की मजा नही आया
हुआ बेटा घर में मेरे बहुत दिया लाढ प्यार
जब तक था पैसा मेरे पास
करता रहा उसकी पूरी हर मांग
तब तक था वो मेरे साथ
फिर जब बदले हालात और हो गया मै बेकार
फिर बन गया मै भार और वो होगया माँ के साथ
और बोला की मजा नही आया
अब कर रहा हूँ मै टाइम पास
कर रहा हूँ इन्तजार की कब जाऊंगा मै
इस दुनिया से पार अपने भगवान के पास
करूँगा शुक्रिया उनका की
चाहे हुआ मै परेशान पर बतादी आपने
मुझे इन सांसारिक रिश्तो की औकात
बस बास मजा आ गया II
लेखक प्रवीन चन्द्र झांझी
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