Sunday, August 1, 2010

ADHURE LOG (INCOMPLETE PEOPLE)

अधूरे लोग 
कुछ लोग हमेशा अधूरे रहते है 
सब के होते हुए भी पास 
वो दिल से सदा सूने रहते है 
कुछ लोग हमेशा अधूरे रहते है 

जब चाहते है वो किसी को 
तो चाहते है इतनी चाहत से
की सामने वाला भी उस चाहत से घबरा जाता है 
वो नहीं पता समझ की 
है वो काबिल उस चाहत के या नहीं 
इसी उलझन में वो खुद को दोराहे पर पाता है
 चाहतो के सफर में वो 
अपने सपनो से जुडे रहते है 
कुछ लोग हमेशा अधूरे रहते है 

वो रहते है अधूरे क्योंकि 
उन्हें समय पर कुछ नही मिलता 
उन्हें मिलता है जब उनमे 
उसे पाने की चाह नही रहती 
रोते है अरमान उनके 
पर जुबान बेवफा कुछ नही कहती 
उनके साथ यह सब  होता है क्योंकि वो
अपने से परायो से घिरे रहते है 
कुछ लोग हमेशा अधूरे रहते है

जब नहीं दिया तुमने हमें अपना अधूरापन
तब हम तुमे अपना अधूरापन कैसे भरने देते
तुमने तो अपना अधूरापन बाँट दिया कइयो में
पर तुम कभी हमारे दिल के दरवाजे से हटी ही नही 
तो किसी को हम अपने दिल में प्रवेश कैसे करने कैसे देते 

शायद तुम तो जीना चाहती थी सिर्फ खुद के लिए
मगर हम तो सिर्फ तुम्हारे साथ थे जीना चाहते 
इस बात को शायद जानती थी तुम
इसीलिए चाहती थी की भर दूँ मै सूनापन तुम्हारा
क्योंकि समझती थी तुम
 कि  चाहे हो जाए तन्हा कितने भी हम
 पर तुमसे शिकवे का कभी कोई शब्द भी न कहते 

मगर ये तो हद है हमारी दीवानगी की 
 या तो हम रहते  है तुम्हारे साथ 
या फिर अपनी चाहतो के साथ रहते  है 
हम अकेले ही संजीदगी से 
अपने सपनो से जुड़े तन्हा बैठे रहते  है 
करते है बाते सिर्फ तुम्हारे साथ 
और नादान दिल को ये समझाते है  

कि है आश्चर्य कितना होते है दीवाने ऐसे भी  
जो रहकर भी अकेले  मस्त इतने रहते है 
कि अपनी मुहब्ब्त कि अपूर्णता में भी इतने पूरे रहते है 
नही करते अपने महबूब से वो शिकवा बेवफाई का 
उस बेवफा की पूर्णता में ही अपने अधूरेपन को भी भूले रहते है
शायद इसीलिए कुछ लोग अधूरे रहकर भी खुद में पूरे रहते है
और नादान जमाने की  नजर मै वो लोग हमेशा अधूरे रहते है II 
लेखक प्रवीन चन्द्र झांझी

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