Saturday, August 7, 2010

SOCH APNI (YOUR OWN THINKING)

सोच अपनी

जो नहीं है वो
बनने की कोशिश मत कर
क्या कहेगा जमाना
इस बात की फ़िक्र मत कर

कर ले तू चाहे कुछ भी,
जमाने में साबित तू खुद को बड़ा नही कर पायेगा
पाते ही मौका पहला
जमाना तुझको तेरी औकात बता जायेगा

किसकी नजर में तू होना चाहता है बड़ा
ये जमाना तो खुद दिल से बहुत छोटा है
ये क्या नापेगा ऊंचाई तेरी
ये तो खुद ही नजर का खोटा है

 जीना चाहता है यहाँ अगर तू
इस समाज के उलाहनो की परवाह तू मत कर
इससे पहले की कोई उठाये कोई ऊँगली तुझ पर
कर दे तू शर्मिंदा इनको, असलियत इनकी बताकर

हूँ मै परेशान इस बात से की
खुद है सने जो कीचड़ में
वो हमारे कपड़ो से धूल उड़ाते है
बड़ी बेशर्मी से बदल कर कपडे अपने
फिर समाज के ठेकेदार बन जाते है

बदलकर सोच अपनी
कही तू साथ जमाने के बह मत जाना
बदल दे तू धारा इसकी
ताकि करे  सलाम तुझे ये जमाना II

लेखक  प्रवीन चन्द्र झांझी 

 

No comments:

Post a Comment